कोर्ट में झूठी गवाही देने पर क्या होगा सज़ा कैसे बचे

इस पोस्ट में हमलोग जानेगें। कोर्ट में झूठी गवाही देने पर उनके खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है साथ ही यदि कोई गवाह अपना बयान कोर्ट में बदल दे तो शिकायतकर्ता उस गवाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है या नहीं। साथ ही झूठी गवा से बचने का भी नियम को समझेगें।

गवाह किसे कहते हैं 

 जब भी कोई अपराध या क्राइम होता है तो उसके दो पक्ष होते हैं । पहला पक्ष अपराध को अंजाम देने वाला और दूसरा पीड़ित पक्ष होता है। यदि कोई तीसरा व्यक्ति इस क्राइम को होते हुए देख रहा है या क्राइम से अवगत है तो यह तीसरा व्यक्ति गवाह कहलाता है।

गवाह का बयान कब लिया जाएगा 

प्रत्येक केस में पुलिस जांच पड़ताल के दौरान गवाह का बयान सीआरपीसी का सेक्शन 161 के तहत दर्ज करती है। सीआरपीसी का सेक्शन 161 में गवाह का हस्ताक्षर लेने का कोई प्रावधान नहीं है, जिसके कारण कोर्ट में गवाह अपना बयान को आसानी से बदल देता है । यदि पुलिस को गवाह के बारे में शक होता है कि वह अपना बयान बाद में बदल सकता है तो उसका सीआरपीसी का सेक्शन 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराया जाता है।  जो गवाह का बयान सीआरपीसी सेक्शन 164 के तहत दर्ज किया जाता है उसको अपना बयान बाद में बदलना आसान नहीं होता है।इन सभी बयान के बाद भी माननीय अदालत के सामने दिया गया बयान ही मान्य होता है। यदि कोर्ट को यह लगता है की गवाह कोर्ट में सही बयान कर रहा है और वह बयान पुलिस के सामने दिया गया बयान से अलग ही क्यों ना हो फिर भी उस बयान को स्वीकार किया जाता है।

सरकारी गवाह कब बनता है 

 पुलिस केस का जांच पड़ताल के समय किसी भी व्यक्ति को सरकारी गवाह बना सकती है जिसको केस के बारे में जानकारी हो । यदि किसी केस में शिकायतकर्ता को यह लगे कि उसका गवाह उसी के खिलाफ झूठी गवाही कोर्ट में दे रहा है और दोषी को बचाने के लिए झूठ बोल रहा है तो शिकायतकर्ता कोर्ट और पुलिस दोनों के मदद से झूठे गवाह पर कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

कोर्ट में झूठी गवाही देने सज़ा 

यदि कोर्ट को केस का किसी भी स्टेज में यह लगता है कि गवाह शपथ लेकर भी झूठ बोल रहा है तो उस गवाह पर सीआरपीसी का सेक्शन 340 के तहत कार्रवाई की जाती है। इस सेक्शन में सजा का कोई फिक्स नहीं है । यदि कोई गवाह किसी निर्दोष व्यक्ति को फसाने के लिए कोर्ट में झूठा गवाही देता है जिससे निर्दोष व्यक्ति को फांसी हो जाए तो ऐसी परिस्थिति में झुठी गवाह देने वाला व्यक्ति को फांसी का सजा हो सकता है। यदि किसी केस में कोई गवाह शिकायतकर्ता के पक्ष में झूठा बयान कोर्ट में देता है तो दोषी व्यक्ति भी उस गवाह के खिलाफ कोर्ट से शिकायत कर सकता है ।

सरकारी कर्मी झूठी गवाही दे तो सज़ा 

यदि कोई सरकारी कर्मचारी कोर्ट में झूठा बयान देता है और उस पर सजा के रूप में ₹100 या इससे अधिक का जुर्माना हो जाए या 1 दिन या इससे ज्यादा समय के लिए जेल हो जाए तो उसका सरकारी नौकरी खत्म हो जाएग।

झूठी गवाही देने से कैसे बचें 

यदि आप कोई केस में किसी वजह से गवाह बन गए हैं चाहे वह पुलिस का दबाव हो या आपके किसी रिश्तेदार का और आप गवाही नहीं देना चाहते हैं तो आपको जैसे ही कोर्ट से गवाही का नोटिस मिलेगा आप कोर्ट में आवेदन देकर अपना नाम गवाही लिस्ट से हटवा सकते हैं । यदि किसी कारणवश आपका नाम गवाही लिस्ट से नहीं हटे और आपको कोर्ट में गवाही देना जरूरी हो जाए तो कोर्ट में आपको कोई भी झूठा शब्द का उपयोग नहीं करना चाहिए। आप जितना जानते हैं और जो सही बात है वही बोलना चाहिए । क्योंकि कोर्ट में झूठा गवाही देने पर होने वाले नुकसान के बारे में हम लोग इस पोस्ट के शुरू में ही बात कर चुके हैं।

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