गाड़ी चोरी हो जाए तो इंश्योरेंस क्लेम कैसे लें

आज की इस पोस्ट में हमलोग बात करेंगे गाड़ी चोरी होने पर आप इंश्योरेंस क्लेम कैसे ले सकते हैं। कुछ मुख्य कानूनी स्टेप है जो गाड़ी चोरी होते हैं, गाड़ी ओनर को करना होता है। यदि गाड़ी ओनर कानूनी प्रक्रिया करने में देरी करता है तो उसे इंश्योरेंस का पैसा नहीं मिलता है। आज के इस पोस्ट में हम लोग इसी टॉपिक पर बात करेंगे की गाड़ी चोरी होने के बाद क्या करना चाहिए ताकि इंश्योरेंस का पैसा जल्दी में मिल सके।

पुलिस में F.I.R दर्ज कराए

आपको जैसे ही आशंका होता है कि आपका गाड़ी चोरी हो गया है तो बिना समय को व्यर्थ किए आपको तुरंत इसका सूचना पुलिस को दे देना चाहिए। यदि आप पुलिस को सूचना देने में देरी करेंगे और आपका गाड़ी का उपयोग जो व्यक्ति आपका गाड़ी चुराया है वह कोई ऐसे भी काम में कर सकता है, जिससे आपको नुकसान हो सकता है। उदाहरण के लिए आपका चुराया गया गाड़ी का उपयोग किसी क्राइम करने के लिए किया जा सकता है। यदि किसी का अपहरण करने के लिए आपका गाड़ी का उपयोग किया जा रहा है और यदि आपका गाड़ी इस कार्य को करते हुए पकड़ा जाता है तो यह सभी ऑब्जेक्शन आपके ऊपर लगेगा, क्योंकि गाड़ी आपके नाम पर है। यदि आप पुलिस में एफआईआर दर्ज करवा देते हैं तो इसके बाद यदि आपका गाड़ी का उपयोग कोई गैरकानूनी काम के लिए किया जाता है तो आपके ऊपर कोई ऑब्जेक्शन नहीं आता है। पुलिस में शिकायत आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से कर सकते हैं । यदि आप ऐसे जगह पर हैं जहां से पुलिस थाना काफी दूर है और आप पुलिस में शिकायत नहीं दर्ज करवा सकते हैं या रात  का समय है तो ऐसी परिस्थिति में आपको 100 नंबर पर फोन करके भी शिकायत दर्ज कर देना चाहिए । आप ऑनलाइन भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं इसके बाद इन्वेस्टिगेशन के बाद आपका इन्वेस्टिगेशन से संबंधित सभी कागजात को ऑनलाइन ही आपका ईमेल आईडी पर पुलिस स्टेशन के द्वारा सबमिट कर दिया जाता है। यदि पुलिस आपका गाड़ी बरामद नहीं कर पाती है तो इसका भी कॉपी आपको ईमेल आईडी पर प्राप्त हो जाता है।


इंश्योरेंस कंपनी को सूचना दें 

यदि आपका गाड़ी चोरी होता है तो चोरी होने के बाद सबसे पहले आपको पुलिस में शिकायत दर्ज करना चाहिए, उसके बाद आपको इंश्योरेंस कंपनी को भी यह सूचना दे देना चाहिए कि आपका गाड़ी चोरी हो गया है, क्योंकि बहुत बार ऐसा प्रैक्टिकली देखा गया है, यदि आप इंश्योरेंस कंपनी को देरी से सूचना देते हैं तो इंश्योरेंस कंपनी यह ऑब्जेक्शन आपके ऊपर लगाता है कि आपने खुद गाड़ी कहीं कबाड़ी में भेज दिए हैं या और कुछ कर दिए हैं जिसके कारण आप इंश्योरेंस का पैसा नहीं ले सकते हैं, तो यह कुछ मुख्य बिंदु है जिसके कारण इंश्योरेंस कंपनी पैसा देने में आनाकानी करता है, तो इससे बचने के लिए जैसे ही आपका गाड़ी चोरी होता है पहले पुलिस में शिकायत करने के बाद आपको तुरंत इंश्योरेंस कंपनी को भी इसका सूचना दे देना चाहिए । इंश्योरेंस कंपनी को भी आप सूचना ऑनलाइन ही दे सकते हैं। गाड़ी का इंश्योरेंस आपने जिस कंपनी से करवाया है उस कंपनी का संपर्क नंबर आप इंटरनेट से निकालकर  संपर्क कर सकते है। इंश्योरेंस कंपनी में शिकायत करते समय आपको अपना गाड़ी का पूरा डिटेल बताना चाहिए कि आप कहां गाड़ी लगाएं और कैसे चोरी हुआ । उसके बाद आपको शिकायत नंबर दिया जाएगा इंश्योरेंस कंपनी के द्वारा, उस नंबर को आप संभाल के रखेंग।

इंश्योरेंस कंपनी में कागज जमा करना 

आप जैसे इंश्योरेंस कंपनी को सूचना देंगे उसके बाद इंश्योरेंस कंपनी कोई एजेंट को हायर करके इसका पता करवाएगी वह एजेंट आप से कांटेक्ट करके आपका गाड़ी का टोटल कागजात देना होगा उसके बाद कंपनी का जो भी आपसे संपर्क करता है और आप जो भी उसको देते हैं उसका आपको रिसीविंग अपने पास संभाल कर रखना चाहिए क्योंकि बाद में इंश्योरेंस कंपनियां भी कर सकती है कि आपने इंश्योरेंस कंपनी में कोई कागजात जमा नहीं किया जिसके कारण आपको इनकम नहीं दिया जाएगा तो इस परिस्थिति में आप जमा कर रहे हैं रिसीव रखते हैं वहां पर काम आ सकता है क्योंकि आपको बता दें कि इंश्योरेंस कंपनी से पैसा नहीं देती है वह हमेशा कुछ न कुछ एलिवेशन लगाने का प्रयास करते रहती है इसलिए आपको कानून के सभी पहलू का पालन करना जरूरी है यदि आप पालन नहीं करते हैं तो फिर आपको इंश्योरेंस कंपनी के द्वारा पैसा नहीं दिया जाएगा।

कब मिलेगा इंश्योरेंस का पैसा 

इंश्योरेंस कंपनी में सभी कागजात जमा करने के बाद आपका गाड़ी का जो IDV  वैल्यू है उस वैल्यू के बराबर आपको इंश्योरेंस कंपनी पैसा मिलेगा। यदि आपने गाड़ी किस्त पर ले रखा है तो किस्त का जितना अमाउंट बचा हुआ है वह अमाउंट आपका IDV वैल्यू से काटकर आपको दिया जाएगा। यदि आपने गाड़ी किस्त पर लिए हैं और आपका सभी कि पूरा हो गया है तो ऐसे परिस्थिति में IDV में जितना राशी का उल्लेख किया गा है उतना आपको मिलेगा। यदि आप और अधिक जानकारी चाहते हैं तो, इस पोस्ट में एक वीडियो भी दिया गया है, आप उस वीडियो को ध्यान से आखरी तक देखें ,उसमें मैंने सभी डिटेल को बताया है कि आपको कौन-कौन कागजात इंश्योरेंस कंपनी को कब देना होता है। यदि आप उस वीडियो को पूरा देख लेंगे तो आपका यह समस्या पूरा हो जाएगा। यहां मैं इसलिए नहीं लिख रहा हूं क्योंकि यह बात  को मैंने वीडियो में पहले ही बता चुका हूं।

 इंश्योरेंस कंपनी पैसा नहीं दे तो

सभी कागजात इंश्योरेंस कंपनी में जमा करने के बाद इंश्योरेंस कंपनी का या उत्तरदाई होता है कि आपका गाड़ी का जितना IDV वैल्यू है उतना पैसा आपको भुगतान करें। यदिइंश्योरेंस  कंपनी राशि का भुगतान करने में आना-कानी कर रहा है तो ऐसी परिस्थिति में आप कंजूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। कंजूमर कोर्ट में कैसे शिकायत किया जाता है इस टॉपिक पर में पहले ही वीडियो भी बना चुका हूं और अपना वेबसाइट पर ही प्रकाशित उस बात को कर चुका हूं। कंजूमर कोर्ट में शिकायत करना बहुत आसान है आप अपना मोबाइल से भी घर बैठे आसानी से शिकायत कर सकते हैं। यदि आप कंजूमर कोर्ट में शिकायत करेंगे तो IDV वैल्यू का पैसा तो आपको मिलेगा ही साथ ही साथ आपने जो कंजूमर कोर्ट में शिकायत किए और वकील किए वह सभी पैसा आपको जोड़ कर दिया जाएगा। साथ ही साथ आपको जो कंजूमर कोर्ट जाने में परेशानी हुआ है। यह सभी पैसा का निर्धारण कंज्यूमर कोर्ट के द्वारा किया जाता है। इसके बाद कंप्यूटर कोर्ट, इंश्योरेंस कंपनी के लापरवाही को देखते हुए कुछ अतिरिक्त भी जुर्माना लगाती है और ये सभी जुर्माना का राशी आपको मिलेगा।

RTO से शिकायत 

गाड़ी चोरी होने के बाद आप पुलिस में शिकायत करेंगे उसके बाद आप इंश्योरेंस कंपनी को शिकायत करेंगे। उसके बाद यह सभी कागजात के साथ आप अपना आरटीओ कार्यालय में भी इस गाड़ी का चोरी होने का सूचना देंगे। आरटीओ कार्यालय में गाड़ी चोरी होने का सूचना देना उतना अनिवार्य तो नहीं है लेकिन यदि आपका कोई कमर्शियल गाड़ी है जैसे कोई ट्रक है तो ऐसी परिस्थिति में आपको RTO से भी शिकायत करना अनिवार्य हो जाता है। यदि आपका कोई प्राइवेट गाड़ी है जैसे मोटरसाइकिल है या कार है तो ऐसी परिस्थिति में आपको आरटीओ से शिकायत करना जरूरी नहीं होता है।

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