मध्यस्था क्या है?

हाल ही में भारत की न्यायपालिका में समझौता के आधार पर विवादों के हल की एक नई संकल्पना का जन्म हुआ है |कानून वेदों ने इसे न्याय एवं अध्यक्षता का नाम दिया है ,मध्यस्थता की कार्यवाही के दौरान एक पढ़ा-लिखा मध्यस्थ या बिचौलिया मुकदमें बाजी में फंसे दोनों पक्षों के बीच समझौता का आधार तैयार करता है |तथा इस आधार पर झगड़े को समाप्त करने में उनकी सहायता करता है, मध्यस्थता की सेवा पूरी तरह निशुल्क है इसमें वादियों का मुकदमे पर होने वाला खर्च भी बढ़ जाता है |इस व्यवस्था के तहत मुकदमे की सुनवाई करने वाला न्यायालय आदेश देकर उस मुकदमे को समझौते के आधार पर निपटाने के लिए मध्यस्थ के पास भेजता है एक मध्यस्थ की भूमिका मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश की भूमिका से बिल्कुल अलग होती है|
    आपराधिक मामलों में भी मध्यस्था की प्रक्रिया दोनों पक्षों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है ,उदाहरण के तौर पर आईपीसी की धारा -498 ए और 406 मामले या चेक बाउंस वाले मामले में प्रक्रम में लिखित अधिनियम नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा -138 के मामलों को निपटाने के लिए मध्यस्थता का सहारा लिया जा सकता है |इसके अतिरिक्त भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी धारा -406, 498 के तहत किसी मामले में यदि समझौता के आधार पर एक पक्ष दूसरे पक्ष को अपेक्षित सामान्य वस्तु लौटाने 17 प्रेम पूर्वक रहने के बाद मान जाता है ,तो मामला अपने आप जाता है सीआरपीसी के तहत दर्ज शिकायत के किसी मामले में यह दूसरा पक्ष अपने उत्तरदायित्व से मुक्त होने के लिए पीड़ित को राशि दे देता है |या किस्तों में भुगतान करने का वचन कर देता है तो मामले सुलझ जाता है और मुकदमा समाप्त हो जाता है इस तरह बहुत से अपराधिक मामले के द्वारा सुलझाए जा सकते हैं|

Court law
Court order
 दिल्ली में निम्न मध्यस्था केंद्र है:
1. तीसरा तल , तीस हजारी न्यायालय परिसर दिल्ली -54 दूर भाषा -2396 1909
2. प्रथम तल ,कड़क डडूमा न्यायालय परिसर ,दिल्ली -32 दूर भाषा- 2230 9085
3. चतुर्थ तल ,रोहिणी न्यायालय परिसर दिल्ली,  दूर भाषा -2755 4459
4. तीसरा तल, द्वारका न्यायालय परिसर ,द्वारका दिल्ली
5. साकेत न्यायालय परिसर, साकेत ,दिल्ली
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