राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, रासुका (NSA) क्या होता है, इसे कब लगाया जाता है?

रासुका कानून क्या है?
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को रासुका के नाम से जानते हैं । इस कानून को इंग्लिश में National Security Act कहा जाता है। इस कानून को 23 दिसंबर 1980 के समय इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान बनाया गया था।

रासुका के तहत शक्तियां

 यह कानून देश की सुरक्षा के लिए सरकार को विशेष शक्ति प्रदान करती है। इस कानून के तहत सरकार किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है। यह कानून केंद्र सरकार और राज्य सरकार को गिरफ्तारी का शक्ति प्रदान करती है। यदि सरकार को ऐसा लगता है कि कोई व्यक्ति देश की सुरक्षा के कार्यों में बाधा डाल रहा है या कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में बाधा डाल रहा है तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता है।

रासुका के तहत गिरफ्तारी 

 इस कानून का उपयोग जिलाधिकारी , पुलिस आयुक्त और राज्य सरकार अपने सीमित दायरे में  कर सकती है। इस कानून के तहत जब कोई अधिकारी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है, तो उसे 12 से 15 दिन के अंदर राज्य सरकार को यह बताना पड़ता है कि गिरफ्तारी किस आधार पर किया गया है ।यदि राज्य सरकार इस गिरफ्तारी का अनुमोदन नहीं करें तो गिरफ्तारी का समय 12 दिन से ज्यादा नहीं हो सकता है। यदि रिपोर्ट को राज्य सरकार अनुमोदन देती है, तो इसे एक सप्ताह के अंदर केंद्र सरकार को भेजना होता है। इस रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र करना आवश्यक है कि किस आधार पर यह आदेश जारी किया गया है और राज्य सरकार का इस पर क्या विचार है ।

सलाहकार समिति का गठन

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकार आवश्यकता अनुसार एक सलाहकार समिति बनाती है। इस समिति में हाईकोर्ट के भी तीन सदस्य होते हैं। इस समिति के पास गिरफ्तारी से संबंधित सभी रिपोर्ट को पेश किया जाता है। रिपोर्ट पेश करने के बाद 7 हफ्ते के अंदर समिति अपना रिपोर्ट सरकार को पेश करती है, साथ ही जो व्यक्ति को रासुका के तहत गिरफ्तार किया गया है उस व्यक्ति को 3 सप्ताह के अंदर सलाहकार समिति के सामने पेश किया जाता है। गिरफ्तार व्यक्ति अपना वकील इस समिति के समक्ष पेश नहीं कर सकती है सलाहकार समिति से जुड़े किसी भी मामले में गिरफ्तार व्यक्ति की ओर से कोई वकील उसका पक्ष नहीं रख सकता है। यदि समिति अपना रिपोर्ट में सरकार को बताती है कि गिरफ्तारी जिस कारण से किया गया है, वह उचित कारण नहीं है, तो फिर गिरफ्तारी को रद्द कर दिया जाता है।

गिरफ्तारी का समय सीमा 

 यदि सलाहकार समिति गिरफ्तार व्यक्ति के कारणों को सही पता है तो सरकार उसकी गिरफ्तारी को जितना उपयुक्त समझे उतना बढ़ा सकती है। गिरफ्तारी का समय एक बार तय हो जाने के बाद उसमें ना तो कोई फेरबदल किया जा सकता है और ना ही सजा कम किया जा सकता है।

विदेशियों की गिरफ्तारी 

 यह नियम भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों पर भी समान रूप से लागू होता है। यदि सरकार को ऐसा लगता है कि कोई विदेशी नागरिक देश की सुरक्षा के कार्यों में बाधा डाल रहा है या कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में बाधा डाल रहा है तो उसे भी गिरफ्तार किया जा सकता है। विदेशी नागरिक के गिरफ्तारी के बाद सजा का भी प्रावधान उसी तरह से किया जाता है , जिस तरह से देश के नागरिक के लिए किया जाता है।

फरार होने की स्थिति में शक्ति 

यदि गिरफ्तार होने वाला व्यक्ति फरार है तो ऐसी स्थिति में सरकार या अधिकारी उस व्यक्ति के क्षेत्र के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के जुडिशल मजिस्ट्रेट को लिखित रूप में रिपोर्ट पेश करती है। इसके बाद अधिसूचना जारी कर संबंधित व्यक्ति को तय समय सीमा के अंदर बताई गई जगह पर उपस्थित होने के लिए कहा जाता है। यदि तय समय सीमा के अंदर संबंधित व्यक्ति अधिसूचना का पालन नहीं करता है तो उसका सजा एक साल और जुर्माना दोनों बढ़ाया जा सकता है।


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