रोड एक्सीडेंट में मुआवजा कैसे लें।

आज के इस पोस्ट में हम लोग बात करेंगे रोड एक्सीडेंट में मुआवजा कैसे ले सकते हैं सरकार से। अब मुआवजा लेना पहले की अपेक्षा काफी आसान हो गया है। आपको बिना कुछ मेहनत किए, बिना कोई परेशानी की आप आसानी से मुआवजा ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए नीचे दिया गया वीडियो को देखें।

 मोटर एक्सीडेंट में आप मुख्य रूप से 2 तरह से मुआवजा ले सकते हैं। हम लोग बारी-बारी से दोनों प्रोसेस को आगे जानेगें।  लेकिन उससे पहले हमलोग कुछ महत्वपूर्ण बात जान लेते हैं जो जानना सभी के लिए काफी महत्वपूर्ण है। मान लेते हैं कोई मोटरसाइकिल से जा रहा था और सामने से चार चक्का से कोई आ रहा था, और दोनों में अचानक टक्कर हो गया लेकिन जो चार चक्का से आ रहा था उसके पास गाड़ी का कोई भी डॉक्यूमेंट नहीं था। इस टक्कर में मोटरसाइकिल वाला का मौत हो गया तो ऐसी परिस्थिति में मुआवजा राशि जो चार चक्का गाड़ी का ऑनर है, जो गाड़ी का मालिक है उसको यहां पर भरना होगा क्योंकि उसका गाड़ी का कोई कागजात नहीं है और ड्राइवर का लाइसेंस भी नहीं।

दुर्घटना दूसरे का वाहन से हो तब क्या होगा 

यदि आपका कोई वाहन है कोई गाड़ी है और आप खुद से चला रहे हैं या आपका कोई ड्राइवर चला रहा है और यदि आपका गाड़ी से कोई दूसरे व्यक्ति की गाड़ी में टक्कर हो जाता है और यदि कोई दूसरा व्यक्ति इसमें मारा जाता है या घायल हो जाता है तो ऐसी परिस्थिति में यदि आपके गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं किया हुआ था तो ऐसे में जो मुआवजा का राशि होगा वह आपको खुद भरना होगा। यदि आप इंश्योरेंस करवा लेते हैं तो मुआवजा का राशि आपको नहीं भरना होगा आपका इंश्योरेंस कंपनी देगी। इसलिए अपना गाड़ी का इंश्योरेंस जरूर करवा लें आपका कोई भी वाहन क्यो ना हो।

एक्सीडेंट होने पर क्या करें 

यदि आप रास्ते में कहीं जा रहे हैं और कोई व्यक्ति का एक्सीडेंट हो जाता है, चाहे आप उस व्यक्ति को नहीं भी जानते हो ऐसे भी परिस्थिति में आप 100 नंबर पर फोन करके पुलिस को जरूर सूचना दे दें। साथ ही साथ 108 नंबर पर फोन करके एंबुलेंस को भी घटना स्थल के बारे में बताएं और घटनास्थल का लोकेशन दें, ताकि एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति का इलाज समय से करवाया जा सके और पुलिस भी वहां आकर घटना का जांच पड़ताल करके उसके परिजन को सूचना दे सके। यहां पर यदि पुलिस लेट से आती है या पुलिस आने में विलंब करती है तो आप भी उस घायल व्यक्ति को किसी नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवा सकते हैं। यदि आप यह बात सोचते हैं कि आप उस घायल व्यक्ति को कहीं हॉस्पिटल ले जाएंगे तो आप कानून और कोर्ट का झंझट में फंस जाएंगे तो आप यहां पर गलत है । आपको कोई भी परेशानी नहीं हो सकता है।

एक्सीडेंट क्लेम कैसे करें 

जब भी एक्सीडेंट होता है तो इंश्योरेंस क्लेम लेने का सबसे आसान तरीका है कि आप पुलिस में इसका सूचना दें।आप 100 नंबर पर फोन करके भी पुलिस को सूचना दे सकते हैं। इसके बाद पुलिस घटनास्थल का निरीक्षण करेगी और घटना के बारे में पूरा जानकारी मात्र 30 दिन के अंदर मोटर एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल को सबमिट करेंगी।  और इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगा। यहां पर पुलिस जब घटनास्थल का निरीक्षण करती है तो आपको यहां पर पुलिस को काफी मदद करने की आवश्यकता है। जैसे आप गाड़ी का सभी कागजात पुलिस को दिखाए जैसे गाड़ी का ड्राइवर का लाइसेंस , गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, गाड़ी का इंश्योरेंस ताकि पुलिस अपना इन्वेस्टिगेशन तेजी से कर सके। आप सीधे मोटर एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल में भी अपना शिकायत कर सकते हैं लेकिन इससे आसान है कि आप पुलिस में ही शिकायत करेगें तो अच्छा रहेगा।

मुआवजा कब मिलेगा 

जब आप पुलिस में शिकायत करते हैं और पुलिस को गाड़ी से संबंधित सभी कागजात देते हैं तो पुलिस आपका इंश्योरेंस कंपनी को भी सूचना देती है। साथ ही साथ आपको भी एक्सीडेंट होने के तत्पश्चात इंश्योरेंस कंपनी को सूचना देना चाहिए। इसके बाद इसी 30 दिन के अंदर जब तक पुलिस मोटर एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल हो अपना रिपोर्ट सबमिट करेगी इंश्योरेंस कंपनी आपको कुछ ऑफर देगी  की आप इतना पैसा ले लें और केस को रफा दफा कर दे। यदि आप इस पैसा से सहमत है तो आप इस पैसा को लेकर अपना केस रफा दफा कर सकते हैं। यदि आप इस पैसा से सहमत नहीं है। इंश्योरेंस कंपनी जीतना पैसा देना चाहती है इतना पैसा से आप संतुष्ट नहीं है तो आप आगे बढ़े। इसके बाद आपका केस कोर्ट जाएगा।  जिस दिन आपका मामला कोर्ट में जाएगा उसके बाद कोर्ट द्वारा पुनः 30  दिन का समय इंश्योरेंस कंपनी को दिया जाएगा मुआवजा तय करने के लिए। इसके बाद आपको इंश्योरेंस कंपनी ऑफर देगी कि आप इतना पैसा ले लीजिए और केस को रफा-दफा कर लीजिए।  यदि आप सहमत हैं तो आपका केस रफा-दफा हो जाएगा । यदि आप सहमत नहीं है तो आपका केस आगे चलेगा और इसके बाद मुआवजा का राशी कोर्ट तय करेगी।

कोर्ट कितना मुआवजा तय करेगा 

कोर्ट मुआवजा का राशि तय करते वक्त खास करके यह बात को देखती है की दुर्घटना में व्यक्ति कितना घायल हुआ है या डेथ हुआ है तो उसका परिजन का उसके ऊपर क्या परवरिश का जिम्मेदारी था। साथ ही साथ जो व्यक्ति का डेट हुआ है उसके ऊपर परिवार का कितना व्यक्ति निर्भर करता था। यदि डेट किया हुआ व्यक्ति का छोटा-छोटा बच्चा हो, पढ़ने- लिखने वाला तो यह सभी बात को कोट ध्यान में रखती है साथ ही यदि दुर्घटना में जो व्यक्ति का मौत हुआ है वह व्यक्ति कोई सरकारी नौकरी पर था, तो उसका नौकरी का भी इनकम देखा जाता है साथी साथ ही साथ यह भी देखा जाता है कि वह कौन पोस्ट पर था उसका कब-कब प्रमोशन होता और वह कितना कमा सकता था। उसका इनकम टैक्स का स्टेटस को भी ध्यान में रखा जाता है । यदि दुर्घटना में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया है तो उसका इलाज पर आने वाला खर्च को भी देखता है। साथ ही साथ यह भी देखता है कि इस व्यक्ति के पीछे अब कितने व्यक्ति को समय देना होगा यदि उदाहरण के लिए मान लेते हैं कि दुर्घटना में कोई व्यक्ति का पैर टूट गया है, तो ऐसी परिस्थिति में कितना पर्सेंट दिव्यांश वह है। यही सब बात को देखकर कोट मुआवजा की राशि को तय करती है।

किसको मिलेगा मुआवजा 

यदि सड़क दुर्घटना में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो जाता है या उसका मौत हो जाता है तो खास करके मौत की स्थिति में उसका परिजन का मुखिया को मुआवजा का राशि भुगतान किया जाता है। यदि गंभीर रूप से घायल है तो उस व्यक्ति से पूछा जाता है कि वह मुआवजा का राशि किसे देना चाहता है साथ ही यदि वह बोलने का स्थिति में नहीं हो तो ऐसे परिस्थिति में भी उसका परिवार का जो मुखिया है उसको यह मुआवजा का राशि प्रदान किया जाता है।

गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं होने पर मुआवजा 

 यदि आपका गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं है तो वैसे भी परिस्थिति में आप सरकार से मुआवजा ले सकते हैं। इसका भी कंडीशन ऊपर बताए गए अनुसार ही है। इसमें आपको कुछ नया नहीं करना होगा, लेकिन यहां पर आपको मुआवजा कोई इंश्योरेंस कंपनी तो नहीं देगी। यहां पर आपको मुआवजा गवर्नमेंट के तरफ से दिया जाएगा। यहां पर एक प्रोविजन किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो जाता है तो उसे सरकार के द्वारा ₹25000 दिया जाता है और मृत्यु होने पर ₹100000 का सहायता राशि प्रदान किया जाता है। 

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