प्रतिलिपि इकाई (कॉपी या नकल ब्रांच)



आम बोलचाल की भाषा में से कॉपी एजेंसी कहा जाता है |कई बार मुकदमे की कार्यवाही के दौरान या बाद में वाक्यों और प्रतिभागियों को न्यायालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध दस्तावेजों कागजात यानी रिकॉर्ड की आवश्यकता पड़ सकती है |    समय-समय पर दिए गए आदेशों का अपने नीचे रिकॉर्ड में रखनी है ,किसी दूसरे अन्य न्यायालय के सबूत पेश करने के लिए भी उन आदेशों की कॉपियों आवश्यकता होती है |विधि द्वारा ऐसे नियम भी बनाए गए विशेष परिस्थितियों में न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों तथा गवाहों के बयान इत्यादि की कॉपी उपलब्ध करवाई जाती है| विचाराधीन मामले में अक्सर प्रमाणित कॉपी संबंध न्यायालय के कर्मचारियों द्वारा आवेदक प्रार्थी को निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है |उदाहरण के तौर पर जेल में बंद किसी विचाराधीन कैदी को न्यायालय के रिकॉर्ड की कॉपी निशुल्क दी जाती है|




Stamp paper
Order documents 




       न्यायालय में एक कॉपी एजेंसी भी होती है या इकाई मुकदमे के दस्तावेज या आदेश के 10 की देख शुद्ध कॉपी उपलब्ध करवाती है, कॉपी लेने के लिए छपे हुए आवेदन पत्र के नमूने न्यायालय परिसर के भीतर बैठे विक्रेताओं के पास हर समय उपलब्ध रहते हैं|  कॉपी के आवेदन पत्र में आवेदक का नाम किसका नंबर पार्टियों के नाम अपराध जिसके लिए मुकदमा चल रहा है, न्यायालय के नाम जहां वह रिकॉर्ड मौजूद है सुनवाई की अगली तारीख तथा कॉपी लेने के उद्देश्य आदि का उल्लंघन किया जाता है| आवेदक द्वारा भरे गए आवेदन पत्र पर कॉपी के पेज ओं की संख्या के अनुसार निर्धारित मूल्य की कोर्ट फीस स्टेम चिपकाने होती है|


              यदि मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो आवेदन पत्र संबंध न्यायालय के रीडर के पास जमा किया जाता है |इसके बाद उच्च न्यायालय को नंबर दिया और कोई दूसरा कलर का आवेदन पत्र पर अपनी रिपोर्ट देता है, कि मांगे गए दस्तावेज न्यायालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध है |अथवा नहीं हेलमत की रिपोर्ट मिलने के बाद न्यायाधीश आवेदक को नियमानुसार उन दस्तावेजों आदेशों की प्रमाणित प्रतिलिपि देने के लिए अपनी स्वीकृति दे देता है |इसके बाद वह आवेदन पत्र कॉपी एजेंसी के इंचार्ज के पास जमा किया जाता है ,यदि आवेदक को किसी दस्तावेज या देश की प्रमाणित कॉपी तुरंत चाहिए अतिरिक्त फीस देकर कॉपी तुरंत प्राप्त की जा सकती है ,प्रमाणित कॉपी का आवेदन प्राप्त होने के बाद कॉपी एजेंसी का कर्मचारी आवेदक को प्रमाणित कॉपी लेने के लिए तारीख देता है |इसलिए दी जाती है ताकि उन दस्तावेजों को न्यायालय से मंगवा कर उनकी कॉपिया तैयार की जा सके |इसके बाद आवेदक तारीख को कॉपी में जाकर उनको प्राप्त कर सकता है |यदि कॉपी की फीस से ज्यादा बनती है तो आवेदक को कॉपी प्राप्त करते समय अनुसार बकाया फीस का भुगतान करना पड़ता है|


  फैसला हो गए मुकदमे में से किसी दस्तावेज की कॉपी के लिए दस्तावेज की कॉपी के लिए दरखास्त सीधे रिकॉर्ड रूम में इंचार्ज को दी जाएगी|


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