धोखाधड़ी का मुकदमा IPC 420

आजके इस वीडियो में हमलोग धोखाधड़ी/छल कपट/ विश्वासघात/ बेईमानी करने वाले को कैसे सबक सिखाया जाएगा इस संबंध में बात करेगें साथ ही धोखाधड़ी/छल कपट/ विश्वासघात करने करने पर होने वाले सजा व जुर्माना का प्रावधान के बारे में जानेगें साथ ही इसमें भारतीय दंड संहिता का कौन-सा धारा लगता है इसके बारे में भी बात करेगें। साथ ही किस परिस्थिति में समझौता होगा और किस परिस्थिति में समझौता नहीं होगा इस विषय पर भी हमलोग विस्तार से चर्चा करेंगे। धोखाधड़ी/ छल कपट/विश्वासघात/बेईमानी भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 419, 420, 467 से संबंधित है। ये सभी धारा के बारे में हमलोग अब बारी बारी से बात करेगें।

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IPC 406 in Hindi

IPC 406 विश्वासघात से संबंधित है। यदी आप अपना समान कोई व्यक्ति को विश्वास पर देते हैं कि दो दिनों के बाद वह व्यक्ति आपको, आपका समान वापस कर देगा लेकिन वह व्यक्ति आपका समान वापस नहीं करता है तो ऐसे परिस्थिति में सामने वाला व्यक्ति IPC 406 का अपराध करता हैं। अगला उदाहरण का यदी बात करें तो सभी व्यक्ति कभी न कभी कुछ समान उधारी पर जरुर बेचता है और यदी सामने वाला जिस समय व तिथि को पैसा देने का बात कहा है उस समय व तिथि को पैसा नही देता है तो वह व्यक्ति IPC 406 का अपराध करता हैं। IPC KA SECTION 406 का अपराध गैर जमानती अपराध है। IPC 406 का अपराध में थाना से जमानत नहीं मिल सकता हैं। जमानत लेने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। यह संज्ञेय अपराध के श्रेणी मे आता हैं इस सेक्शन में FIR दर्ज होते ही पुलिस मुजरिम को गिरफ्तार करके जेल भेज देती हैं। इस सेक्शन में तीन साल का सजा व जुर्माना का प्रावधान किया गया है। IPC 406 का अपराध समझौता योग्य हैं।

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IPC 419 in Hindi

IPC 419 प्रतिरूपण से संबंधित है। यदी कोई व्यक्ति प्रतिरूपण करके कुछ अपराध करता है तो वहाँ IPC 419 लगाया जाता है। इसको हमलोग एक उदाहरण से समझते हैं मान लीजिये आपने कही का यात्रा करने के लिए रेल में टिकट बुक किया परन्तु वह टिकट से कोई दूसरा व्यक्ति यात्रा कर रहा हैं ऐसे परिस्थिति में दूसरा व्यक्ति प्रतिरूपण कर रहा है यानी कि आपका रुप रख कर कार्य कर रहा हैं। इसी प्रकार यदी आपका मोबाइल में किसी को काॅल आता हैं और कोई दूसरा व्यक्ति आपके नाम से बात करता हैं तो यह भी प्रतिरूपण का अपराध है। अब आप प्रतिरूपण शब्द को अच्छा तरह से समझ गये होंगे। IPC 419 का अपराध संज्ञेय अपराध हैं। इसमें FIR दर्ज होते ही पुलिस मुजरिम को गिरफ्तार करके जेल भेज देती हैं। इसमें तीन साल का सजा व जुर्माना का प्रावधान किया गया। यदी अपराध ज्यादा गंभीर होगा तो सज़ा के साथ-साथ जुर्माना भी भरना होगा। यह समझौता योग्य अपराध हैं इसमे वादी और प्रतिवादी चाहे तो समझौता करके मामला को रफा-दफा कर सकता हैं।

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IPC 420 in Hindi

IPC 420 ग़लत दस्तावेज बनाने से संबंधित है। यदी कोई व्यक्ति किसी तरह का गलत दस्तावेज बनाता है या बनाने का योजना बना रहा है तो ऐसे परिस्थिति में IPC ka Section 420 लागू होगा। यदी कोई व्यक्ति के घर में छापामारी के दौरान सरकारी कार्यालय का मोहर बरामद होता हैं तो यहाँ पर यही बात समझा जाएगा कि वह व्यक्ति कोई गलत दस्तावेज बनाने का योजना बना रखा था और यहाँ पर IPC 420 लगेगा। IPC 420 का अपराध को संज्ञेय अपराध के ज्ञेणी में रखा गया है। इसमें FIR दर्ज होते ही पुलिस मुजरिम को गिरफ्तार करके जेल भेज देती हैं। यह गैर जमानत अपराध हैं इसमे थाना से जमानत नहीं मिल सकता हैं लेकिन कोर्ट से जमानत लिया जा सकता है। इसमें सात साल का सजा व जुर्माना का प्रावधान किया गया है। यादी अपराध ज्यादा गंभीर होगा तो सज़ा के साथ-साथ जुर्माना भी भरना होगा। यह अपराध समझौता योग्य है इसमें वादी और प्रतिवादी न्यायालय के मापदंड के अनुसार समझौता करके मामला को रफा-दफा कर सकता है।

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IPC 467 in Hindi

IPC 467 भी गलत दस्तावेज बनाने से संबंधित अपराध में लागू होता हैं। जिस तरह IPC 420 था उसी के समानान्तर IPC 467 हैं लेकिन IPC 467 ज्यादा से ज्यादा गंभीर आरोप माना जाता है। जब कोई व्यक्ति किसी का महत्वपूर्ण दस्तावेज को गलत तरीका से बनाता है तब IPC 467 लागू होता है। मान लीजिये यदी कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के जमीन का कागजात फर्जी तरीके से तैयार करके बेचता है या बेचने का योजना बना रहा हैं या कोई ऐसा फर्जी दस्तावेज तैयार करता है जो काफी महत्वपूर्ण हो तो ऐसे परिस्थिति में IPC 467 लागू होता है। यह गैर जमानती अपराध है इसमें थाने से जमानत नहीं मिलेगा लेकिन कोर्टजमानत लिया जा सकता है। इसमें यदी सजा का बात करें तो 10 साल का सजा से लेकर आजीवन कारावास तक का सजा का प्रावधान किया गया है साथ ही साथ जुर्माना का भी प्रावधान किया गया है। यह अपराध समझौता योग्य नहीं हैं।

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