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मानहानि क्या है जाने IPC 500 और 499 को

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मानहानि क्या है। 


आप लोग कभी ना कभी जरूर सुने होंगे कि किसी व्यक्ति पर मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया है। आज की इस पोस्ट में हमलोग समझेंगे कि मानहानि का मुकदमा क्या  है और इसमें कितना सजा का प्रावधान किया गया है? मानहानि का मुकदमा कैसे कोर्ट में दर्ज किया जाता है और कौन-कौन से गलती करने पर मानहानि का केस दर्ज किया जाता है। चलिए सबसे पहले हम लोग बात कर लेते हैं की मानहानि होता क्या है यदि साधारण शब्दों में कहें तो मानहानि वह प्रभाव है जब किसी व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति पर आधारहीन आरोप , आलोचना और उसके बारे में गलत धारणा समाज में पेश करता है, जिससे संबंधित व्यक्ति का समाज में मान मर्यादा और प्रतिष्ठा पर बुरा असर पड़ता है। तब संबंधित व्यक्ति कोर्ट में अपने खिलाफ हो रहे दुष्प्रचार और अपनी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए केस फाइल करता है जिसे मानहानि कहते हैं।






मानहानि कैसे होता है 


 आज के समय में लोग डिजिटल होते जा रहे हैं और इस समय अपराध करने के भी तरीके बदल गए हैं।  इस समय में फेसबुक, ट्विटर , यूट्यूब जैसी सोशल साइट भी किसी व्यक्ति समाज या समुदाय के मानहानि के लिए उपयोग किए जा रहे आपशब्दों को भी अपराध घोषित किया गया है। साथ ही किसी व्यक्ति के फोटो के साथ छेड़छाड़ कर या किसी तरह की अश्लील हरकतें करके उसको किसी भी सोशल साइट पर शेयर करना भी मानहानि के दायरे में आता है।


मानहानि का मुख्य धारा 


सूचना और प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के सेक्शन 66 ए के तहत कोई भी व्यक्ति यदि किसी कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट के सहयोग से फेसबुक , ट्वीटर , यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे अन्य सोशल साइट पर किसी सामाजिक संस्था या कोई कंपनी या फिर कोई व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का उपयोग करता है तो उस पर भी मानहानि के तहत केस फाइल किया जाता है। मानहानि का केस आईपीसी का सेक्शन 500 और 499 के तहत फाइल किया जाता है।  ऐसी स्थिति में दोषी पाए गए अपराधी को कानून द्वारा निर्धारित की गई अवधि तक कैद या जुर्माना हो सकता है । प्रैक्टिकली यह देखा गया कि मानहानि के अपराध में अधिकतम 2 साल तक का सजा हो सकता है।  अपराध की गंभीरता को देखते हुए अपराधी को सजा और जुर्माना दोनों भी हो सकता है।


मानहानि कितने प्रकार के होते हैं 


 मरे हुए व्यक्ति के बारे में भी अपमानजनक टिप्पणी करना जिससे उनके फैमिली के अन्य सदस्य का मर्यादा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचे तो यह भी मानहानि के दायरे में आता है । यदि किसी व्यक्ति पर आप मजाक के दृष्टिकोण से भी कुछ ऐसी टिप्पणी करते हैं जिससे उसकी मर्यादा और सम्मान को ठेस पहुंचे तो यह भी मानहानि के दायरे में आता है। यदि किसी व्यक्ति को मानहानि से किसी प्रकार की आर्थिक क्षति पहुंची है तो वह न्यायालय में मुआवजा के लिए अपील भी कर सकता है।


मानहानि का मुकदमा में न्यायालय का फीस 


 अपराधिक मामले के लिए जहां न्नायायालय में नाममात्र का फीस देना पड़ता है वहीं मुआवजे के दावे में जितना मुआवजा मांगा गया है उसके 5 से 7% न्यायालय में जमा करना पड़ता है । जिसका अलग अलग राज्य में अलग-अलग निर्धारित किया गया है।


झूठी FIR पर मानहानि 


 यदि कोई निर्दोष व्यक्ति को बदनाम करने के लिए या ब्लैकमेल करने के लिए उस पर झूठी FIR दर्ज करा देता है और यदि उस व्यक्ति को उस केस में न्यायालय बड़ी कर देता है तो इस परिस्थिति में भी पीड़ीता मानहानि का मुकदमा झूठा FIR दर्ज करने  वाले व्यक्ति पर चला सकता है और मुआवजे की मांग कर सकता है।


मानहानि से कैसे बचे 


यदि आपको मानहानि से हमेशा दूरी बना कर रखना है तो यह सभी जानकारी को हमेशा ध्यान में रखना पड़ेगा क्योंकि आजकल जो प्रैक्टिकली देखा जा रहा है सबसे ज्यादा मानहानि का मुकदमा सोशल साइट पर किए गए अपमान के कारण ही होता है

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