BNS Section 35 in Hindi – धारा 35 क्या है? शरीर और संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार

 BNS Section 35 in Hindi – धारा 35 क्या है?


BNS Section 35 in Hindi: भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita 2023) की धारा 35 व्यक्ति को अपने शरीर, किसी अन्य व्यक्ति के शरीर तथा अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति की निजी रक्षा करने का अधिकार देती है। हालांकि यह अधिकार धारा 37 में दिए गए प्रतिबंधों के अधीन है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 1 जुलाई 2024 से लागू है और इसने भारतीय दंड संहिता (IPC) का स्थान लिया है। BNS की धारा 34 से 44 तक निजी प्रतिरक्षा (Right of Private Defence) से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।


BNS Section 35 क्या है?

BNS की धारा 35 का विषय है – “Right of private defence of body and of property”, अर्थात शरीर और संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा का अधिकार।

धारा 35 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को, धारा 37 में दिए गए प्रतिबंधों के अधीन, निम्नलिखित की रक्षा करने का अधिकार है:

1. अपने शरीर की रक्षा करना।

2. किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की रक्षा करना।

3. अपनी चल या अचल संपत्ति की रक्षा करना।

4. किसी अन्य व्यक्ति की चल या अचल संपत्ति की रक्षा करना।

यह अधिकार किन परिस्थितियों में लागू होगा, इसे समझना बहुत महत्वपूर्ण है।

धारा 35 BNS के तहत शरीर की रक्षा का अधिकार

BNS Section 35 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को अपने शरीर तथा किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की रक्षा करने का अधिकार है।

यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के शरीर के विरुद्ध ऐसा अपराध करने का प्रयास करता है जो मानव शरीर को प्रभावित करता है, तो परिस्थितियों के अनुसार निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रयोग किया जा सकता है।

उदाहरण

मान लीजिए A पर B हमला करता है और B का उद्देश्य A को शारीरिक नुकसान पहुंचाना है। ऐसी स्थिति में A को कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर अपनी रक्षा करने का अधिकार हो सकता है।

इसी प्रकार यदि किसी तीसरे व्यक्ति पर हमला हो रहा है, तो परिस्थितियों के अनुसार कोई दूसरा व्यक्ति भी उसकी रक्षा कर सकता है।


BNS Section 35 में संपत्ति की रक्षा


धारा 35 केवल शरीर की रक्षा तक सीमित नहीं है। यह चल और अचल संपत्ति की रक्षा का अधिकार भी प्रदान करती है।


इसमें निम्नलिखित अपराधों से संपत्ति की रक्षा शामिल है:

- चोरी (Theft)

- डकैती (Robbery)

- शरारत/संपत्ति को नुकसान पहुंचाना (Mischief)

- आपराधिक अतिचार (Criminal Trespass)

- इन अपराधों को करने का प्रयास


इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति को अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति को ऐसे अपराधों से बचाने के लिए निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रयोग करने की अनुमति कानून देता है, लेकिन यह अधिकार कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के अधीन है।

BNS Section 35 और Section 37 का संबंध


धारा 35 को समझने के लिए BNS Section 37 को भी समझना जरूरी है।


धारा 35 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि निजी प्रतिरक्षा का अधिकार Section 37 में दिए गए restrictions के अधीन है।


इसलिए इसका यह अर्थ नहीं है कि कोई व्यक्ति किसी भी स्थिति में अपनी इच्छा के अनुसार बल प्रयोग कर सकता है।


निजी प्रतिरक्षा का अधिकार कानून द्वारा निर्धारित परिस्थितियों और सीमाओं के अनुसार ही प्रयोग किया जा सकता है।


क्या BNS Section 35 में किसी की हत्या की जा सकती है?


सिर्फ धारा 35 पढ़कर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि निजी रक्षा के नाम पर किसी व्यक्ति की हत्या की जा सकती है।


BNS में निजी प्रतिरक्षा के अधिकार से संबंधित आगे की धाराओं में यह बताया गया है कि किन विशेष परिस्थितियों में शरीर की निजी रक्षा का अधिकार मृत्यु कारित करने तक विस्तारित हो सकता है।


विशेष रूप से BNS Section 38 शरीर की निजी रक्षा के अधिकार के मृत्यु कारित करने तक विस्तारित होने वाली परिस्थितियों से संबंधित है।


वहीं Section 37 निजी प्रतिरक्षा के अधिकार पर महत्वपूर्ण प्रतिबंध बताती है।


BNS Section 35 का सरल अर्थ


आसान भाषा में समझें तो:


अगर किसी व्यक्ति के शरीर या संपत्ति पर कानून में बताए गए प्रकार का अवैध हमला या अपराध हो रहा है, तो उसे कानून की निर्धारित सीमाओं के भीतर अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की रक्षा करने का अधिकार है।


लेकिन निजी रक्षा का अधिकार असीमित नहीं है।


BNS Section 35 के महत्वपूर्ण बिंदु


विषय| जानकारी

कानून| Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा| Section 35

अध्याय| General Exceptions

विषय| शरीर और संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा

शरीर की रक्षा| अपने और किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की

संपत्ति की रक्षा| अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की चल/अचल संपत्ति

संपत्ति से संबंधित अपराध| चोरी, डकैती, शरारत, आपराधिक अतिचार और उनके प्रयास

महत्वपूर्ण सीमा| Section 37 के प्रतिबंध लागू


BNS Section 35 और IPC Section 97 में अंतर


पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) में निजी प्रतिरक्षा के शरीर और संपत्ति संबंधी अधिकार का प्रावधान Section 97 में था।


BNS में इसी विषय से संबंधित प्रावधान Section 35 में दिया गया है।


इसलिए परीक्षा की दृष्टि से यह याद रखना उपयोगी है:


IPC Section 97 → BNS Section 35


BNS Section 35 से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न


प्रश्न 1: BNS Section 35 किससे संबंधित है?


उत्तर: शरीर और संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार से।


प्रश्न 2: क्या व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की रक्षा कर सकता है?


उत्तर: हाँ, Section 35 के अनुसार व्यक्ति अपने शरीर के साथ-साथ किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की भी निजी रक्षा कर सकता है, धारा 37 के प्रतिबंधों के अधीन।


प्रश्न 3: क्या Section 35 संपत्ति की रक्षा का अधिकार देता है?


उत्तर: हाँ। यह अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की चल अथवा अचल संपत्ति की रक्षा का अधिकार देता है।


प्रश्न 4: Section 35 के तहत किन संपत्ति संबंधी अपराधों से रक्षा की जा सकती है?


उत्तर: चोरी, डकैती, शरारत, आपराधिक अतिचार तथा इन अपराधों को करने के प्रयास से।


प्रश्न 5: क्या निजी प्रतिरक्षा का अधिकार असीमित है?


उत्तर: नहीं। Section 35 के तहत यह अधिकार Section 37 में दिए गए प्रतिबंधों के अधीन है।


BNS Section 35 – परीक्षा के लिए याद रखें


BNS 35 = Right of Private Defence of Body and Property


याद रखने का आसान तरीका:


35 → Body + Property Defence


- Body → अपने और दूसरे व्यक्ति के शरीर की रक्षा

- Property → अपनी और दूसरे व्यक्ति की संपत्ति की रक्षा

- Theft → चोरी

- Robbery → डकैती

- Mischief → शरारत/संपत्ति को नुकसान

- Criminal Trespass → आपराधिक अतिचार

- Restriction → Section 37


निष्कर्ष


BNS Section 35 व्यक्ति को अपने तथा अन्य व्यक्ति के शरीर और अपनी या अन्य व्यक्ति की संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा का अधिकार प्रदान करती है। संपत्ति की रक्षा का अधिकार चोरी, डकैती, शरारत और आपराधिक अतिचार जैसे अपराधों तथा उनके प्रयासों के विरुद्ध लागू हो सकता है।


हालांकि, निजी प्रतिरक्षा का अधिकार पूर्ण या असीमित अधिकार नहीं है। इसे BNS की अन्य संबंधित धाराओं, विशेष रूप से Section 37 में दिए गए प्रतिबंधों के साथ पढ़ना आवश्यक है।


नोट: यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी और अध्ययन के उद्देश्य से है। किसी वास्तविक मामले में कानूनी सलाह के लिए योग्य अधिवक्ता से परामर्श करें।


FAQ – BNS Section 35 in Hindi


BNS Section 35 क्या है?


BNS Section 35 शरीर और संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार से संबंधित है।


BNS की धारा 35 किसे सुरक्षा देती है?


यह व्यक्ति को अपने तथा किसी अन्य व्यक्ति के शरीर और अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार देती है, कानून में निर्धारित सीमाओं के अधीन।


BNS Section 35 में संपत्ति की कौन-कौन सी चीजें शामिल हैं?


धारा 35 में चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्ति शामिल हैं।


BNS Section 35 और IPC Section 97 में क्या संबंध है?


IPC Section 97 निजी प्रतिरक्षा के शरीर और संपत्ति संबंधी अधिकार से संबंधित था, जबकि BNS में इसी विषय का प्रावधान Section 35 में है।


क्या BNS Section 35 का अधिकार बिना किसी सीमा के है?


नहीं। Section 35 के अनुसार निजी प्रतिरक्षा का अधिकार Section 37 में दिए गए प्रतिबंधों के अधीन है।

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