BNS Section 37 in Hindi – धारा 37 क्या है? निजी प्रतिरक्षा के अधिकार पर प्रतिबंध


BNS Section 37 in Hindi: भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita 2023) की धारा 37 निजी प्रतिरक्षा (Right of Private Defence) के अधिकार पर प्रतिबंध से संबंधित है। यह धारा बताती है कि किन परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को निजी बचाव का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।

BNS की धारा 35 के अंतर्गत व्यक्ति को अपने शरीर, किसी अन्य व्यक्ति के शरीर तथा अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति की रक्षा करने का अधिकार दिया गया है। लेकिन यह अधिकार पूर्ण और असीमित नहीं है। Section 37 इसी अधिकार की सीमाएं निर्धारित करती है।

BNS Section 37 का अंग्रेजी नाम:

Acts against which there is no right of private defence

आसान भाषा में कहा जाए तो धारा 37 बताती है कि कब Private Defence का अधिकार नहीं मिलेगा और बचाव करते समय कितनी शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है।

BNS Section 37 क्या है?

BNS Section 37 के अनुसार कुछ विशेष परिस्थितियों में व्यक्ति निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का दावा नहीं कर सकता।

इस धारा के मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण भाग हैं:

1. कुछ परिस्थितियों में निजी प्रतिरक्षा का अधिकार नहीं मिलेगा।

2. निजी प्रतिरक्षा में आवश्यकता से अधिक नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।

Section 37 में लोक सेवक (Public Servant), लोक सेवक के निर्देश और सार्वजनिक प्राधिकरण से सहायता लेने का समय उपलब्ध होने जैसी परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है।

BNS Section 37 के मुख्य प्रावधान

धारा 37 को आसान भाषा में समझने के लिए इसे चार प्रमुख नियमों में समझ सकते हैं।

1. लोक सेवक द्वारा सद्भावना में किए गए कार्य के विरुद्ध

यदि कोई लोक सेवक (Public Servant) अपने पद के अधिकार के तहत Good Faith में कोई कार्य करता है और उस कार्य से सामान्य रूप से मृत्यु या गंभीर चोट (Grievous Hurt) की आशंका उत्पन्न नहीं होती, तो उसके विरुद्ध निजी प्रतिरक्षा का अधिकार नहीं होगा।

यह स्थिति तब भी हो सकती है जब लोक सेवक का कार्य कानून के अनुसार पूरी तरह उचित न हो।

हालांकि, यह प्रतिबंध उस स्थिति में लागू नहीं होता जब संबंधित व्यक्ति को पता न हो या उसके पास यह मानने का कोई उचित कारण न हो कि सामने वाला व्यक्ति लोक सेवक है।

2. लोक सेवक के निर्देश पर किए गए कार्य के विरुद्ध

Section 37 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक के निर्देश पर, उसके पद के अधिकार के तहत और Good Faith में कोई कार्य करता है, तो ऐसी स्थिति में भी निजी प्रतिरक्षा का अधिकार नहीं होगा, बशर्ते उस कार्य से मृत्यु या गंभीर चोट की उचित आशंका न हो।

यहां भी यह महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति को पता हो या उसके पास यह मानने का कारण हो कि सामने वाला व्यक्ति लोक सेवक के निर्देश पर कार्य कर रहा है।

यदि वह व्यक्ति अपने अधिकार का स्रोत बताता है या उसके पास लिखित प्राधिकरण है और मांगने पर उसे प्रस्तुत करता है, तो यह तथ्य भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

3. जब सरकारी/सार्वजनिक प्राधिकरण की सहायता लेने का समय हो

BNS Section 37 का एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि यदि किसी व्यक्ति के पास सार्वजनिक प्राधिकरणों (Public Authorities) की सहायता लेने का पर्याप्त समय है, तो वह सामान्य रूप से निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का सहारा नहीं ले सकता।

आसान भाषा में:

जहां तुरंत खुद बल प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है और पुलिस या संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण से सहायता लेने का पर्याप्त समय उपलब्ध है, वहां निजी प्रतिरक्षा का अधिकार उसी तरह उपलब्ध नहीं माना जाएगा।

इस प्रावधान का उद्देश्य Private Defence के अधिकार के दुरुपयोग को रोकना है।

4. जरूरत से ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता

BNS Section 37 का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Sub-section (2) है।

इसके अनुसार:

निजी प्रतिरक्षा का अधिकार किसी भी परिस्थिति में रक्षा के उद्देश्य के लिए आवश्यक से अधिक नुकसान पहुंचाने तक विस्तारित नहीं होता।

इसका सरल अर्थ है कि व्यक्ति को अपनी रक्षा करने का अधिकार है, लेकिन बचाव के नाम पर आवश्यकता से बहुत अधिक नुकसान पहुंचाना उचित नहीं होगा।

उदाहरण

मान लीजिए कोई व्यक्ति आपको हल्का धक्का देकर भागने की कोशिश करता है और आपको गंभीर चोट या मृत्यु का वास्तविक खतरा नहीं है।


ऐसी स्थिति में सिर्फ बदला लेने के लिए उस व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल करना Private Defence की सीमा से बाहर जा सकता है।


इसलिए Private Defence का उद्देश्य बचाव करना है, बदला लेना नहीं।

BNS Section 37 के उदाहरण


उदाहरण 1 – लोक सेवक द्वारा कार्य


मान लीजिए एक लोक सेवक अपने आधिकारिक कर्तव्य का पालन करते हुए किसी व्यक्ति को रोकता है। उसके कार्य से मृत्यु या गंभीर चोट की उचित आशंका नहीं है और वह सद्भावना में कार्य कर रहा है।

ऐसी स्थिति में केवल इस आधार पर कि कार्य पूरी तरह कानूनी नहीं था, व्यक्ति को निजी प्रतिरक्षा का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।

उदाहरण 2 – लोक सेवक के निर्देश पर कार्य

मान लीजिए किसी लोक सेवक ने अपने आधिकारिक अधिकार के तहत किसी व्यक्ति को एक कार्य करने का निर्देश दिया।

यदि वह कार्य Good Faith में किया जा रहा है और उससे मृत्यु या गंभीर चोट की उचित आशंका नहीं है, तो सामान्यतः उसके विरुद्ध Private Defence का अधिकार उपलब्ध नहीं होगा।

उदाहरण 3 – पुलिस की सहायता लेने का समय

मान लीजिए पड़ोसियों के बीच किसी संपत्ति को लेकर विवाद है। स्थिति तत्काल खतरनाक नहीं है और पुलिस या अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण से सहायता लेने के लिए पर्याप्त समय मौजूद है।

ऐसी स्थिति में व्यक्ति स्वयं अत्यधिक बल प्रयोग करके समस्या का समाधान करने के लिए Private Defence का दावा नहीं कर सकता।

उदाहरण 4 – जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग

मान लीजिए कोई व्यक्ति आपको मामूली रूप से नुकसान पहुंचाने का प्रयास करता है और आप आसानी से उस खतरे को रोक सकते हैं।

यदि खतरा रोकने के लिए जितना बल आवश्यक था, उससे कई गुना अधिक बल प्रयोग करके आप उस व्यक्ति को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं, तो Section 37(2) की सीमा महत्वपूर्ण हो जाती है।

BNS Section 37 में "Good Faith" का क्या महत्व है?

Section 37 में लोक सेवक द्वारा किए गए कार्य के संबंध में Good Faith यानी सद्भावना का उल्लेख किया गया है।

इसका मतलब यह है कि संबंधित लोक सेवक अपने पद और कर्तव्य के संदर्भ में ईमानदारी से कार्य कर रहा हो।

लेकिन केवल किसी व्यक्ति का लोक सेवक होना ही हर परिस्थिति में Private Defence को समाप्त नहीं करता। Section 37 में विशेष रूप से यह देखा जाता है कि उसके कार्य से मृत्यु या गंभीर चोट की उचित आशंका उत्पन्न होती है या नहीं।

BNS Section 37 में Explanation 1 क्या है?

Section 37 में दिया गया Explanation 1 महत्वपूर्ण है।

यदि कोई कार्य किसी लोक सेवक द्वारा किया जा रहा है, तो व्यक्ति केवल इसलिए Private Defence के अधिकार से वंचित नहीं होगा कि सामने वाला व्यक्ति लोक सेवक है।

यदि उसे यह पता ही नहीं है या उसके पास यह मानने का कारण नहीं है कि सामने वाला व्यक्ति लोक सेवक है, तो स्थिति अलग हो सकती है।

इसलिए ज्ञान (Knowledge) या विश्वास करने का उचित कारण महत्वपूर्ण है।

BNS Section 37 में Explanation 2 क्या है?

Explanation 2 लोक सेवक के निर्देश पर किए गए कार्य से संबंधित है।

यदि कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक के निर्देश पर कार्य कर रहा है, तो Private Defence के अधिकार को निर्धारित करने में यह देखा जाएगा कि सामने वाले व्यक्ति को यह पता है या विश्वास करने का कारण है कि वह लोक सेवक के निर्देश पर कार्य कर रहा है।

यदि वह व्यक्ति अपने अधिकार का स्रोत बताता है या उसके पास लिखित प्राधिकरण है, तो मांग किए जाने पर उसे प्रस्तुत करने का प्रश्न भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

BNS Section 37 का आसान अर्थ

एक लाइन में याद करें:

"Private Defence का अधिकार है, लेकिन यह असीमित अधिकार नहीं है।"

धारा 37 के अनुसार:

- हर परिस्थिति में Private Defence नहीं मिलेगा।

- लोक सेवक के Good Faith वाले कुछ कार्यों के विरुद्ध Private Defence सीमित है।

- लोक सेवक के निर्देश पर किए गए कुछ कार्यों के विरुद्ध भी यह अधिकार सीमित है।

- जहां Public Authority की सहायता लेने का पर्याप्त समय हो, वहां Private Defence का अधिकार नहीं होता।

- बचाव के लिए आवश्यक से अधिक नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।

BNS Section 35 और Section 37 में अंतर

आधार| BNS Section 35| BNS Section 37

विषय| निजी प्रतिरक्षा का अधिकार| निजी प्रतिरक्षा के अधिकार पर प्रतिबंध

मुख्य उद्देश्य| किसकी रक्षा की जा सकती है| किन परिस्थितियों में अधिकार नहीं मिलेगा

शरीर| अपने और दूसरे व्यक्ति का शरीर| अधिकार की सीमाएं

संपत्ति| अपनी और दूसरे व्यक्ति की संपत्ति| अधिकार के प्रयोग पर प्रतिबंध

महत्वपूर्ण बात| Private Defence का अधिकार| Excessive harm की मनाही

संबंधित धारा| Section 34 से जुड़ा| Section 35 के अधिकार पर restriction

BNS में Section 35 स्वयं स्पष्ट रूप से कहती है कि शरीर और संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा का अधिकार Section 37 के restrictions के अधीन है।

BNS Section 37 और Section 38 में अंतर

BNS Section| विषय

Section 35| शरीर और संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा

Section 36| अस्वस्थ मस्तिष्क आदि व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध निजी प्रतिरक्षा

Section 37| ऐसे कार्य जिनके विरुद्ध निजी प्रतिरक्षा का अधिकार नहीं है

Section 38| किन परिस्थितियों में शरीर की निजी रक्षा मृत्यु कारित करने तक बढ़ सकती है

Section 39| किन परिस्थितियों में मृत्यु के अलावा अन्य नुकसान पहुंचाया जा सकता है

Section 40| शरीर की निजी रक्षा कब शुरू और कब समाप्त होती है

India Code में Section 37 के बाद Section 38 और 39 निजी प्रतिरक्षा की सीमा से संबंधित अलग-अलग प्रावधान देती हैं।

BNS Section 37 के महत्वपूर्ण बिंदु


प्रश्न| उत्तर

BNS Section 37 किससे संबंधित है?| Private Defence के अधिकार पर प्रतिबंध

क्या हर स्थिति में Private Defence मिलेगा?| नहीं

क्या लोक सेवक के हर कार्य के विरुद्ध Private Defence नहीं मिलेगा?| नहीं, Section 37 में निर्धारित परिस्थितियां महत्वपूर्ण हैं

Public Authority की सहायता लेने का समय हो तो?| Private Defence का अधिकार सीमित होता है

क्या जरूरत से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं?| नहीं

Private Defence का उद्देश्य क्या है?| बचाव, न कि बदला

Section 37 का अगला महत्वपूर्ण प्रावधान| Section 38

BNS Section 37 – परीक्षा के लिए याद रखने की Trick

37 = "No Private Defence + Necessary Harm Only"


इसे चार शब्दों में याद रखें:

Public Servant → Direction → Authority → Excess Harm


अर्थात:


P – D – A – E


- P = Public Servant

- D = Direction of Public Servant

- A = Authority से सहायता लेने का समय

- E = Excess Harm नहीं

BNS Section 37 से जुड़े महत्वपूर्ण MCQ


MCQ 1. BNS Section 37 किससे संबंधित है?


A. चोरी

B. निजी प्रतिरक्षा के अधिकार पर प्रतिबंध

C. हत्या

D. अपहरण


सही उत्तर: B. निजी प्रतिरक्षा के अधिकार पर प्रतिबंध

MCQ 2. BNS Section 37 के अनुसार Private Defence का अधिकार किस स्थिति में उपलब्ध नहीं होता?


A. हर छोटी घटना में

B. जब सार्वजनिक प्राधिकरण की सहायता लेने का समय उपलब्ध हो

C. केवल रात में

D. केवल संपत्ति के मामले में


सही उत्तर: B. जब सार्वजनिक प्राधिकरण की सहायता लेने का समय उपलब्ध हो

MCQ 3. Private Defence में कितना नुकसान पहुंचाया जा सकता है?


A. जितना चाहे

B. उससे दोगुना

C. जितना रक्षा के उद्देश्य के लिए आवश्यक हो

D. कोई सीमा नहीं


सही उत्तर: C. जितना रक्षा के उद्देश्य के लिए आवश्यक हो

MCQ 4. BNS Section 37 में किस पद पर कार्य करने वाले व्यक्ति का उल्लेख है?


A. न्यायाधीश

B. लोक सेवक

C. वकील

D. निजी कर्मचारी


सही उत्तर: B. लोक सेवक

MCQ 5. Section 37 के अनुसार Private Defence का अधिकार किस उद्देश्य से अधिक नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं देता?


A. बदला लेने के लिए

B. संपत्ति लेने के लिए

C. रक्षा के उद्देश्य के लिए

D. आरोपी को दंड देने के लिए


सही उत्तर: C. रक्षा के उद्देश्य के लिए

MCQ 6. BNS Section 35 के तहत Private Defence किस धारा के restrictions के अधीन है?


A. Section 34

B. Section 36

C. Section 37

D. Section 38


सही उत्तर: C. Section 37

MCQ 7. BNS Section 37 का संबंध किस अधिकार से है?


A. गिरफ्तारी का अधिकार

B. निजी प्रतिरक्षा का अधिकार

C. संपत्ति हस्तांतरण का अधिकार

D. जमानत का अधिकार


सही उत्तर: B. निजी प्रतिरक्षा का अधिकार

MCQ 8. Section 37(2) का मुख्य सिद्धांत क्या है?


A. कोई भी बल प्रयोग किया जा सकता है

B. केवल आवश्यक सीमा तक नुकसान पहुंचाया जा सकता है

C. हमेशा मृत्यु कारित की जा सकती है

D. केवल पुलिस बल प्रयोग कर सकती है


सही उत्तर: B. केवल आवश्यक सीमा तक नुकसान पहुंचाया जा सकता है

FAQ – BNS Section 37 in Hindi


Q1. BNS Section 37 क्या है?


BNS Section 37 निजी प्रतिरक्षा के अधिकार पर प्रतिबंधों से संबंधित प्रावधान है। यह बताती है कि किन परिस्थितियों में Private Defence का अधिकार उपलब्ध नहीं होगा।


Q2. क्या BNS Section 37 Private Defence को पूरी तरह समाप्त करती है?


नहीं। यह Private Defence के अधिकार को पूरी तरह समाप्त नहीं करती, बल्कि कुछ विशेष परिस्थितियों में उस पर प्रतिबंध लगाती है।


Q3. क्या लोक सेवक के खिलाफ Private Defence लिया जा सकता है?


Section 37 में निर्धारित परिस्थितियों में लोक सेवक के Good Faith में किए गए कुछ कार्यों के विरुद्ध Private Defence का अधिकार नहीं होता, खासकर जहां मृत्यु या गंभीर चोट की उचित आशंका नहीं है।


Q4. क्या Private Defence में किसी को जरूरत से ज्यादा चोट पहुंचाई जा सकती है?


नहीं। Section 37(2) के अनुसार रक्षा के उद्देश्य के लिए आवश्यक से अधिक नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं है।


Q5. अगर पुलिस या Public Authority से सहायता लेने का समय हो तो क्या होगा?


यदि सार्वजनिक प्राधिकरण की सुरक्षा लेने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध है, तो Section 37 के अनुसार Private Defence का अधिकार उपलब्ध नहीं होता।


Q6. BNS Section 37 के बाद कौन-सी धारा आती है?


BNS Section 38 आती है। यह बताती है कि किन परिस्थितियों में शरीर की निजी रक्षा का अधिकार मृत्यु कारित करने तक विस्तारित हो सकता है।


Q7. BNS Section 37 परीक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?


यह Judiciary, APO, ADPO, AIBE, LLB और अन्य Law Competitive Exams के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें Private Defence की महत्वपूर्ण सीमाएं दी गई हैं।

निष्कर्ष


BNS Section 37 निजी प्रतिरक्षा के अधिकार की सीमाओं को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण धारा है। Section 35 व्यक्ति को शरीर और संपत्ति की रक्षा का अधिकार देती है, लेकिन Section 37 यह स्पष्ट करती है कि इस अधिकार का प्रयोग हर परिस्थिति में नहीं किया जा सकता।


यदि लोक सेवक द्वारा Good Faith में ऐसा कार्य किया जा रहा है जिससे मृत्यु या गंभीर चोट की उचित आशंका नहीं है, यदि लोक सेवक के निर्देश पर ऐसा कार्य किया जा रहा है, या यदि सार्वजनिक प्राधिकरण से सहायता लेने का पर्याप्त समय उपलब्ध है, तो Private Defence के अधिकार पर Section 37 के अनुसार प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।


सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Private Defence का अधिकार बचाव के लिए है, बदला लेने के लिए नहीं। रक्षा के उद्देश्य से आवश्यक से अधिक नुकसान पहुंचाना Section 37 के तहत अनुमत नहीं है।


कानूनी नोट: यह लेख सामान्य अध्ययन और शैक्षणिक जानकारी के लिए है। किसी वास्तविक कानूनी मामले में लागू कानून और परिस्थितियों के अनुसार योग्य अधिवक्ता से सलाह लें।