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अभियुक्त को गिरफ्तार करते समय पुलिस को क्या कदम उठाने चाहिए?

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कोई भी पुलिस अधिकारी सी आर पी एस की धादे- 41 के तहत किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के आदेश या वारंट के बिना भी गिरफ्तार कर सकता है| यदि आपने कोई असंगत साधारण अपराध किया है, तो सबसे पहले वह आपसे आपका नाम और पता इत्यादि पूछता है ,यदि आप अपना नाम और पता बताने से इनकार करते हैं ,या गलत सूचना देते हैं तो ऐसी परिस्थिति में वह आप को हिरासत में ले सकता है| ऐसा इसलिए किया जाता है ,ताकि आप की सही पहचान का पता लगाया जा सके| अतः कोई अपराध होने पर यदि कोई पुलिस अधिकारी आपसे आपका नाम पता पूछता है, तो उसे सही जानकारी दें और जो भी वह पूछे उसे सच सच बता दे|
पुलिस किसी महिलाओं को सूर्योदय से पहले या सूर्योदय होने के बाद गिरफ्तार नहीं कर सकती है, हां कुछ मामले इसके अपवाद हो सकते हैं |जिसमें किसी महिला को गिरफ्तार करते हुए समय की पाबंदी नहीं देखी जाती| परंतु जब भी ऐसी कोई परिस्थिति आती है, तो महिला पुलिस अधिकारी उस क्षेत्र के जहां वह अपराध हुआ है यह जिस क्षेत्र से उस (महिला को गिरफ्तार किया जाना है) प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट से महिला को हिरासत में लेने की पूर्व अनुमति लेती है|     
                  Police Arrest
                        पुलिस हिरासत में लिए गए व्यक्ति को आजादी पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध नहीं लगा सकती है ,पर उसे ऐसे प्रतिबंध लगाने का अधिकार अवश्य होता है,
जिससे अभियुक्त के हिरासत से भागने की संभावना को टाला जा सके|

हिरासत में लेते समय अभियुक्त को दिए जाने वाले जानकारी तथा सूचना

जब कोई पुलिस अधिकारी या अन्य पुलिस कर्मी किसी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार करता है, तो वह अभियुक्त को उस अपराध से जुड़ी पूरी जानकारी देता है ,जिसके लिए उसे हिरासत में लिया गया है ,तथा साथ ही व अभियुक्त को यह भी बताता है| कि उसे उस अपराध के लिए किस आधार पर गिरफ्तार किया गया है|
यदि कोई पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को बिना वारंट के किसी जमानत की अपराध के मामले में गिरफ्तार करता है ,तो वह अभियुक्त को बताता है, कि उस जमा उसे जमानत मिल सकती है |और वह अपने लिए जमाना देने वाले किसी व्यक्ति या व्यक्तियों का इंतजाम कर सकता है|
  जब कोई पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करता है ,तो वह निश्चित उस निश्चित तौर पर सूचित करता है कि उसे अपने किसी मित्र रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को अपनी गिरफ्तारी की सूचना देने का पूरा अधिकार है| तथा साथ ही वह यह भी बता सकता है, कि उसे कहां और किस पुलिस स्टेशन में रखा गया है|

                  केवल यही नहीं गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी या कोई दूसरा पुलिसकर्मी भी हिरासत में लिए गए व्यक्ति के मित्र रिश्तेदार या किसी निकट संबंधी को उसकी गिरफ्तारी की जानकारी दे सकता है| साथ ही वह यह भी जानकारी देता है ,कि अभियुक्त को किस कारण से पुलिस हिरासत में लिया गया है |तथा उसे किस पुलिस स्टेशन में यह किस जगह पर बंधक बनाकर रखा गया है ,या सूचना देने के सबूत के तौर पर संबंधित पुलिस अधिकारी सूचना दिए जाने की पुष्टि पुलिस स्टेशन के रजिस्टर में करता है|

मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना

यदि कोई पुलिस अधिकारी बिना वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करता है |तो उस इलाके के मजिस्ट्रेट या फिर थाना प्रभारी के सामने पेश करना होता है| बिना वारंट के गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को पुलिस 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रख सकती है| अभियुक्त की गिरफ्तारी के स्थान से लेकर मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक के सफर की अवधि को 24 घंटे की समय सीमा से बाहर रखा जाता है|

   कोई अभियुक्त अपनी डॉक्टरी जांच का अनुरोध किस प्रकार कर सकता है?

गिरफ्तार किया गया व्यक्ति मजिस्ट्रेट के सामने पेश होकर या हिरासत में किसी भी समय आपने डॉक्टरी जांच का निवेदन कर सकता है| इसके लिए वह इस बात को आधार बना सकता है कि उसकी डॉक्टरी जांच साबित करेगी कि उसने वह अपराध नहीं किया है, इसके अलावा डॉक्टरी जांच के लिए इस बात को भी आधार बनाया जा सकता है| कि डॉक्टरी जांच से साबित हो गया हो जाएगा कि किसी दूसरे व्यक्ति ने उसके शरीर के साथ अपराध किया है| या शारीरिक क्षति पहुंचाई है, ऐसे किसी भी अनुरोध पर मजिस्ट्रेट गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक से शारीरिक जांच करवाने का निर्देश देता है| यद्यपि मजिस्ट्रेट पैसे किसी अनुरोध को अस्वीकार करने की शक्ति भी प्राप्त होती है यदि मजिस्ट्रेट को लगता है, कि चिकित्सा जांच का अनुरोध मामले की सुनवाई घोटाले न्याय की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए किया गया है, तो वह चिकित्सा जांच के लिए दरखास्त को खारिज कर सकता है| चिकित्सा जांच के बाद अभियुक्त प्राधिकार प्राप्त होता है|

किशोर की हिरासत

पुलिस किसी अपराध के लिए अभियुक्त बनाए गए किसी किशोर किशोरी अब बच्चे को पुलिस स्टेशन में नहीं रख सकती है| किशोर वह है जिसकी आयु अपराध के समय 18 साल से कम है ,ऐसे किशोर को जुवेनाइल न्याय बोर्ड के पास पेश करना होता है| ऐसे किशोर को रखने के लिए सरकार ने अलग से सुधार गिरी बनाए हैं ,इन सुधार गृहों के निर्माण का उद्देश अपराध में लिप्त पाए गए कम उम्र के युवक युवतियों और बच्चों को खतरनाक और पेशेवर अपराधियों के संपर्क से बचाना है|
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