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अग्रिम जमानत,Anticipatory bail क्या होता है।

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Anticipatory bail क्या है 


जब कोई व्यक्ति गिरफ्तार होने वाला हो या उसे ऐसा लगता है कि उसे किसी झूठे केस में फंसाकर गिरफ्तार करवाया जा सकता है, तो ऐसे में जेल जाने से बचने के लिए वह कोर्ट से पहले ही जमानत लेता है जिसे अग्रिम जमानत कहते हैं। अग्रिम जमानत को इंग्लिश में एंटीसिपेटरी बैल कहते हैं। कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद, कोर्ट पुलिस को आदेश देती है कि इस व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।










Anticipatory bail कितने तरह का होता है



 अग्रिम जमानत मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं 



(1) F.I.R होने से पहले:- यदि किसी व्यक्ति को यह लगे कि उसपर कोई व्यक्ति झूठा एफ आई आर दर्ज करवा सकता है या फिर झूठा F.I.R दर्ज करने का योजना बना रहा है, तो कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है । इसमें कोर्ट पुलिस को यह आदेश देती है कि यदि कोई इस पर किसी तरह का F.I.R कर दे तो इसे गिरफ्तार नहीं किया जाए।



 (2) F.I.Rहोने के बाद:-  यदि कोई व्यक्ति आपके खिलाफ एफ आई आर दर्ज करता है और पुलिस जांच पड़ताल करती है, तो हो सकता है कि आपको गिरफ़्तार भी किया जा सके ,तो गिरफ्तारी से बचने के लिए आप अग्रिम जमानत का आवेदन कोर्ट में दे सकते हैं । यदि आपको लगता है कि आपके ऊपर किया गया है F.I.R झूठा है तो अग्रिम जमानत के लिए जो आप आवेदन देंगे उसमें यह बात को भी दर्शाना होगा कि F.I.R दर्ज किया गया है। साथ ही यदि आपके पास यह एफ आई आर को झूठा साबित करने का कोई साक्ष्य है तो वह भी आपको आवेदन के साथ सबमिट करना चाहिए। जिस व्यक्ति का क्रिमिनल रिकॉर्ड अच्छा रहता है उसे आसानी से अग्रिम जमानत मिल जाता है, लेकिन कोर्ट को यह बात विश्वास दिलाना होता है की अग्रिम जमानत लेने के बाद किसी गवाह या केस जांच पड़ताल में वह किसी प्रकार का कोई बाधा नहीं डालेगा। अग्रिम जमानत में खासकर केस आयो और सरकारी वकील आपका ज्यादा विरोध करें तो फिर आपको अग्रिम जमानत नहीं मिलेगा।


Anticipatory bail का उद्देश्य 



अग्रिम जमानत का मुख्य उद्देश है, किसी निर्दोष व्यक्ति को किसी झूठे केस में फंसा कर उसका आर्थिक हानि और बदनामी से बचाया जा सके। लेकिन यह सिर्फ इस शर्त पर कि अगर कोर्ट को यह लगे कि व्यक्ति निर्दोष है और पुलिस सही जांच नहीं कर पा रही है तो कोर्ट उसे आसानी से अग्रिम जमानत दे देता है। अग्रिम जमानत का यही मुख्य उद्देश्य है। अग्रिम जमानत सिर्फ सेशन कोर्ट से ही मिलती है या फिर विशेष परिस्थिति में संविधान के अनुच्छेद 226 में हाईकोर्ट रिट द्वारा भी ली जा सकती है।


Anticipatory bail के फायदे



अग्रिम जमानत मिलने के बाद पुलिस संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती है। पुलिस बिना गिरफ्तार किए ही केस का पूरा जांच पड़ताल करती है और कोर्ट में चार्जशीट फाइल करती है। यदि गैर जमानती अपराध के आरोप में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार होने का शंका हो रहा है तो अग्रिम जमानत का आवेदन कर सकता है। कोर्ट सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत दे सकता है। यह जमानत पुलिस की जांच पुरा होने तक जारी रहती है, मतलब केस में जब तक पुलिस जांच पड़ताल करेगी तब तक यह अग्रिम जमानत सक्रिय रहेगा। अग्रिम जमानत का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 438 में दिया गया है ।अग्रिम जमानत का आवेदन करने पर शिकायतकर्ता को भी कोर्ट अग्रिम जमानत के बारे में सूचना देती है, ताकि वह चाहे तो कोर्ट में उपस्थित होकर अग्रिम जमानत का विरोध कर सकें।


Anticipatory bail कितने दिन में मिलेगा 



जब कोई व्यक्ति कोर्ट के सामने अग्रिम जमानत का आवेदन करता है तो यह जरूरी नहीं है कि उसी दिन अग्रिम जमानत मिल जाए। यह भी हो सकता है कि बेल के आवेदन पर बहुत लंबा किसी मुद्दे को लेकर बहस भी हो सकती है जिसमे की तारीख पे तारीख लगती जा रही हो। ऐसे में आवेदनकर्ता के तरफ से यह आवेदन किया जाना चाहिए कि एक निश्चित तारीख के बीच पड़ने वाले समय में फाइनल ऑर्डर से पहले टेम्प्रोरी बेल दिया जाए, क्योंकि इस बीच अगर आवेदनकर्ता गिरफ्तार हो गया तो इस अग्रिम जमानत का कोई उचित तथ्य नहीं रहेगा। इसलिए कोर्ट में आवेदनकर्ता को अगली तारीख तक टेंपरेरी बेल के लिए प्रार्थना करना चाहिए।


Anticipatory bail का आवेदन कहाँ करें 



अग्रिम जमानत का आवेदन आप के ऊपर जहां अपराध हुआ है वहां पर कर सकते हैं या शिकायतकर्ता ने अपना शिकायत जिस थाने में किया है उस थाने के अंतर्गत आने वाले कोर्ट में कर सकते हैं या आप उस जगह भी कर सकते हैं जहां आपको शंका हो रहा है कि आपके ऊपर झूठा एफ आई आर दर्ज किया जा सकता है इन सभी जगहों में से आप अपना सुविधा के अनुसार कहीं भी अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।


Anticipatory bail का मुख्य बिन्दु 



(1) अगर आपके खिलाफ अभी तक कोई झूठी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है और आपको झूठी एफआईआर दर्ज होने का आशंका है तो इस परिस्थिति में आप कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दे सकते हैं । आपको आवेदन में यह भी बताना होगा कि आपको झूठा केस में क्यों फंसाया जा रहा है। आपको झूठे केस में फंसाने से शिकायतकर्ता को क्या-क्या लाभ मिल सकता है और आपको झूठा केस में फंसाने का मकसद क्या है । साथ ही आप कोर्ट से यह भी बताएं कि यदि आप गिरफ्तार हो गए तो आपको किस प्रकार का नुकसान होगा जैसे कि शारीरिक हानि, मानसिक हानि और शिकायतकर्ता को आपका गिरफ्तारी से मिलने वाला फायदा के बारे में भी बताएं। यदि आपका गिरफ्तारी होता है तो शिकायतकर्ता को इससे क्या-क्या फायदा हो सकता है।


(2) अगर आपके ऊपर झूठा F.I.R दर्ज किया गया है तो आप अपने अग्रिम जमानत वाले एप्लीकेशन में वह सभी सबूत को भी दें जिससे कि आपका पक्ष मजबूत हो और शिकायतकर्ता का पक्ष कमजोर हो साथ झूठा F.I.R उन्होंने किस ग्राउंड पर बनाया है उस ग्राउंड से संबंधित आपके पास जो भी साक्ष्य हो वह सभी साक्ष्य को कोर्ट में पेश करना चाहिए।


(3) जब आप अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में आवेदन करते हैं तो आप कोर्ट को इस बात का विश्वास दिलाएं कि आप केस मैं बेगुनाह है साथ ही आपके उपर झूठा F.I.R किया गया है।  अपना बेगुनाही से संबंधित सभी सबूत को कोर्ट में दे तथा जो व्यक्ति आपके ऊपर झूठा एफ आई आर दर्ज किया है उसके अगेंस्ट में यदि उससे पूर्व में वह व्यक्ति किसी केस में फंसा हो या जेल गया हो या वह अपराधी प्रवृत्ति का आदमी हो उससे संबंधित आपके पास जो भी साक्ष्य हो उस साक्ष्य को भी कोर्ट में पेश करना चाहिए। ताकि आप उस व्यक्ति को फर्जी साबित कर सके और अपने आप को बेगुनाह साबित कर सकें।


(4)  कोर्ट को यह भी विश्वास दिलाएं कि आपको बैल मिलने के बाद आप किसी प्रकार का जांच पड़ताल में और गवाही को हानि नहीं पहुंचाएंगे साथ ही कोर्ट को यह भी विश्वास दिलाएं कि इस केस में किसी प्रकार की इंक्वारी की जरूरत नहीं है तथा ना ही कोई नया मोड़ आया है और ना ही आने की संभावना है। ऐसे में आपको अग्रिम जमानत जल्दी दिया जा सकता है।


(5)  अग्रिम जमानत लेने के लिए आप अपने टैक्स रिटर्न या अपने पर आश्रित परिवार के छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने लिखने वाले बच्चे या बुजुर्ग माता-पिता या अपनी कम या ज्यादा उम्र का सहारा लेकर भी बेल ले सकते हैं। या आपका परिवार में आपका माता पिता या आपके बच्चे कोई गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं तो इसको भी जमानत का आधार बनाया जा सकता है। 


(6)  अग्रिम जमानत लेने में सबसे बड़ी बाधा केस आयो व सरकारी वकील होते हैं। अगर वे आपकी बेल का ज्यादा विरोध नहीं करें तो फिर आपको कोर्ट से आसानी से बेल मिल सकता है। अब इन लोगों का विरोध कोर्ट के अंदर कैसे करना चाहिए साथ ही इन लोगों को अपना बेल से संबंधित विरोध करने से कैसे रोका जाना चाहिए यह बात को अब आप भली-भांति समझ गए होंगे। साथ ही आप अपना वकील से भी बेल के संबंध में काफी लंबा चर्चा करें और उस व्यक्ति के साथ जिन्होंने आपके ऊपर झूठा मुकदमा दर्ज किया है उसका समाज में   किस प्रकार का गतिविधि है इसके बारे में भी खुलकर अपना वकील को बताए। साथ ही उसके और आपके बीच किस प्रकार का रिलेशन है इस बारे में भी अपने वकील से खुलकर बात करें। ताकि आपका वकील आपका बेल के लिए कोई मजबूत ग्राउंड ढूंढ सके।


Anticipatory bail का विरोध कैसे करें 



यदि आप किसी व्यक्ति पर मुकदमा किए हैं और वह यदि कोर्ट से अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया है तो ऐसी परिस्थिति में कोर्ट आपको भी नोटिस देकर बुलाएगा ताकि कोर्ट को केस की स्थिति और सच का पता चल सके, लेकिन अगर आप चाहे तो कोर्ट में एक केविट के एप्लीकेशन भी लगा सकते है।  ताकि जब भी आरोपी अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट पहुंचे तो आपको भी विरोध के लिए नोटिस करके बुलाया जाए। आप यह व्यवस्था कर सकते हैं ।अब आगे बात कर लेते हैं अग्रिम 


जमानत का विरोध किस आधार पर आप करेंगे।



(1)   कोर्ट में अपराधी के बेल मिलने पर वह आपको और आपके गवाह को साथ ही केस से संबंधित कुछ साक्ष्य को भी वह प्रभावित कर सकता है और जमानत लेकर जमानत का दुरुपयोग कर सकता है बात का ग्राउंड बनाकर आप अपराधी का विरोध कर सकते हैं।


(2)  अगर किसी चीज या कोई सामान का केस में मिलना जरूरी है जैसे कोई मोबाइल फोन हो उसका कॉल रिकॉर्ड जाँच के लिए या कॉल डिटेल निकालने के लिए तो आप पुलिस के द्वारा अपराधी का गिरफ्तारी की मांग कर सकते हैं।


(3) कोर्ट द्वारा आपसे पूछे जाने वाले सवाल का जवाब आप बहुत ही शालीनता व समझदारी के साथ दें ताकि कोर्ट को यह लगे कि आप सही है और उस व्यक्ति का बेल खारिज हो जाए।


(4) अगर कोर्ट द्वारा अपराधी को बेल दे भी दिया जाए तो आप ऊपर की कोर्ट में उसकी बेल को खारिज करवाने का एप्लीकेशन लगा सकते हैं ताकि उसका बेल ख़ारिज जाए।


(5)  केस आयो यदि अग्रिम जमानत का विरोध नहीं करें साथ ही यदि आपको यह शंका हो कि केस आयो को अपराधी खरीद लिया है तो ऐसे में आप एसपी को आवेदन देकर अपना के आयो को बदलवा सकते हैं , साथ ही यदि सरकारी वकील अग्रिम जमानत का विरोध नहीं करें तो ऐसे परिस्थिति में आपको अपने तरफ से वकील हायर कर लेना चाहिए ताकि उसका बेल को खारिज करवाया जा सके।


Anticipatory bail कैसे निरस्त कराए



यदि अपराधी को अग्रिम जमानत मिल गया है तो शिकायतकर्ता सेशन कोर्ट, जिसने यह जमानत दी है या फिर आप हाईकोर्ट में इसके खिलाफ आवेदन करके इसे निरस्त भी करवा सकता है। लेकिन यहां एक वैलिड ग्राउंड होना जरूरी है। आप आवेदन में इस बात को ग्राउंड बना सकते हैं कि अपराधी अग्रिम जमानत लेकर केस से संबंधित सबूत को मिटाने का कोशिश कर रहा है या मिटा रहा है साथ ही गवाह को धमका रहा है या डरा रहा है इसी प्रकार का जो उसका एक्टिविटी है उसके अनुसार आप ग्राउंड बनाकर उसका बेल को खारिज भी करवा सकते हैं।


Anticipatory bail मिलने के शर्त 



कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत मिलने के बाद आरोपी जेल जाने से तो बच जाते हैं लेकिन उसके ऊपर कई प्रकार के पाबंदी भी कोर्ट द्वारा लगाई जाती है जो  बेल बांड से अलग है। जैसे कि आप शिकायतकर्ता को परेशान नहीं करेंगे। किसी भी गवाह या सबूत को मिटाने का प्रयास नहीं करेंगे। इसके अलावा कोर्ट आपको विदेश जाने पे भी पाबंदी लगा देती है। तथा आरोपी को एक निश्चित एरिया में ही रहने का इजाजत कोर्ट द्वारा दिया जाता है ।आरोपी के लिए एक निश्चित समय सीमा तय किया जाता है उस निश्चित समय सीमा पर उसको बार-बार पुलिस स्टेशन जाकर अपना हाजिरी लगाना पड़ता है। यदि आरोपी यह सब नहीं करेंगा या कोर्ट का कोई आदेश का उल्लंघन करेंगा तो आपका अग्रिम जमानत रद्द किया जा सकता है।


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